रविवार, 24 नवंबर 2013

कटाक्ष

3/1/2014
रात की ठिठुरती ठण्ड में
असहाय, लाचार पड़े लोग
न रैन बसेरा है न ओढ़ने को चादर
बस यूँ ही रात की ठण्ड में कपकपाते है लोग

25/12/2013
बी जे पी तू कांग्रेस पर वार कर
कांग्रेस तू बी जे पी पर वार कर
तू कर अन्य दलों पर वार
पर आम जन की भावनाओं पर खिलवाड़ न कर
कहीं ऐसा न हो कि आम जन तुमसे खेल बैठे ॥

मंगलवार, 19 नवंबर 2013

ख़ुशी के पल

चुपी  साधकर न कहते हुए भी बहुत कुछ कह गये
शर्माती हुई  पलकों को झुककर इजहार कर गये ।

जिंदगी का क्या भरोषा,
कब साथ छोड़ दे अपना ।
पल जियें दो पल जियें ,
अपनों को खुशियां देते रहें ।
कल हो न हो यह कौन जानता ,
बस यूँ समझो आज दिन आपका ॥

जीवन जीना भी तभी सरल होता है
जब मित्रो कि कतार आप-सी हो ॥
हर दुख संकटों से उभर सकते हैं
जब मित्रों की छाया साथ-साथ हो ॥

यह जिंदगी सौ जतन करने के बाद मिली है
इसे व्यर्थ न जाने दो दोस्तों
न जाने फिर यह जीवन नशीब हो न हो
जी ले आज, अफ़सोस न कर न जाने फिर कल हो न हो